कुरमुरे, रसभरे सेब के उत्पादन के लिए जाना जाने वाले कश्मीर का गास्सु गांव तो कम से कम इन दिनों स्ट्रॉबेरी उपजा कर अच्छा लाभ कमा रहा है।

ये सब तकरीबन एक दशक पहले तब शुरू हुआ जब गांव के ही एक किसान सत्तर साल के हाजी अब्दुल अहद मीर ने प्रयोग के तौर पर अपनी जमीन के एक छोटे से टुकड़े पर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। इस खेती से मीर साहब को ठीक ठाक लाभ हुआ। इसके बाद मीर ने अपने दस हेक्टेयर को स्ट्रॉबेरी के बाग में तब्दील कर दिया। उनके बेटे तारिक अहमद मीर बताते हैं सेब का एक पेड़ बारह साल में एक बार फल देता है जबकि स्ट्रॉबेरी की खेती हर साल होती है। स्ट्रॉबेरी को न तो ज्यादा बारिश औऱ न ही ज्यादा धूप की जरूरत होती है जो कश्मीर के मौसम के बिल्कुल अनुकूल है। हम लोग अगस्त में इसकी खेती शुरू करते हैं और मई में इसको तोड़ लेते हैं। एक महीने तक तकरीबन रोजाना इनके पौधों से स्ट्रॉबेरी तोड़ी जाती है।

स्थानीय बाज़ार में अपने स्ट्रॉबेरी बेच कर प्रतिवर्ष 70,000 रूपए से बढ़कर मीर परिवार की सालाना आमदनी अब तीन से चार लाख रूपए तक पहुंच चुकी है। स्ट्रॉबेरी उत्पादन से मिलने वाले इस लाभ को देखकर इलाके में धान उपजाने वाले किसान भी अब इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। गास्सू में ही बारह साल पहले तक तकरीबन सौ एकड़ में धान, टमाटर, पालक, और मूली उपजाया जाता था जबकि आज इस गांव के तकरीबन सौ एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती की जा रही है जिसकी मदद से सालाना 1500 टन स्ट्रॉबेरी का उत्पादन हो रहा है। किसानों के इस पहल से उत्साहित होकर राज्य का बागवानी विभाग ने भी हाल ही में गांव के किसानों को स्ट्रॉबेरी से जैम और पेय पदार्थ बनाने का प्रशिक्षण दिया है।

मीर परिवार के स्ट्रॉबेरी की खेती से न केवल उनकी आमदनी में इजाफा हुआ बल्कि इलाके में इस वजह से उन्होंने प्रतिष्ठा भी खुब कमाया। सन 2009 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से दिए जाने वाले तरक्की याफ्ता किसान अवार्ड जीतने वाले हाज़ी अब्दुल पहले कश्मीरी किसान बने। उन्हें 2010 में चौधरी चरण सिंह पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है। तारीक को इस बात का फक्र है कि उनकी सफलता की वजह से स्ट्रॉबेरी आज पूरे गांव का मुख्य फसल बन चुका है। तारीख कहते हैं शुरू में व्यक्तिगत उपयोग के लिए लोग अपने कीचन गार्डेन में स्ट्रॉबेरी उपजाते थे, आज गांव की अस्सी फ़ीसदी खेतों में स्ट्रॉबेरी लगी हुई है।

(अंग्रेजी दैनिक हिन्दुस्तान टाइम्स से साभार)

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