पंजाब के नानोवाल गांव में गुरविंदर सिंह सोही के दस एकड़ में फैले ग्लाडियोलस फूलों के फार्म को देखकर सहसा आपको लगेगा कि आप हॉलैंड के किसी फार्म में खड़े हैं। रंगों का ये समुच्चय पूरे परिदृश्य में फैले गेंहू की फसल से उपजे एकरसता को तोड़ते से लगते हैं।

पैंतीस वर्षीय सोही अपने ग्लाडियोलस के फुलों के साथ व्यस्त हैं जिन्हें प्यार से वो ग्लैड कहते हैंउन्हें पता है कि इन फूलों के खिलने से पहले ही उन्हें तोड़ना होगा क्योंकि पूरी तरह से खिलने का इंतजार वो नहीं कर सकते। हाल ही में शुरू किए अपने इस व्यवसाय आरटीएस के जरिए वो इन फुलों को चंडीगढ़, लुधियाना और पटियाला तक डीलरों को भेजते हैं। फुलों की इन टहनियों और बल्ब का वो फेसबुक औऱ कभी कभी तो व्हाट्सअप के जरिए भी विपणन करते हैं। इन टहनियों से उन्हें प्रति एकड़ दो लाख रूपए तक की कमाई हो जाती है। शादियों और त्यौहारी सीजन में इन टहनियों को सात रूपए तक बेचते हैं। एक बार प्रति एकड़ तकरीबन डेढ़ लाख रूपए तक के निवेश के बाद इन फुलों के बीज पौधों से ही मिल जाते हैं। आठ साल तक के बीज के इस जीवनावधि में उन्हें इन फूलों से प्रति साल प्रति एकड़ डेढ़ लाख से उपर का लाभ होता है। ये लाभ हालांकि उन्हें अपने कई बार के असफल प्रयत्नों के बाद हासिल हुआ है जिसमें मशरूम उगाने, अश्व पालन, जीपों को ग्राहकों की मर्जी के मुताबिक तैयार करने से लेकर पड़ोस के शहर में मिठाइयां बेचने तक के प्रयत्न शामिल रहे। साल 2008 के बाद से सोही ने ग्लोडियोलस फुलों की खेती शुरू की जिसमें पहले उन्होंने राज्य बागवानी विभाग से इन फुलों पर मिलने वाली सब्सिडी का अध्ययन भी किया। अपने प्रयत्नों के जरिए पिछले साल सोही ने बारह सदस्यों के एक किसान क्लब की शुरूआत की जिसमें सालाना पांच हज़ार रूपए देकर सदस्य बिजली से चलने वाले स्प्रे औऱ बीजारोपण का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही जैविक हल्दी, दाल, मक्के और बासमती चावल उपजाने के लिए प्रोत्साहन भी प्राप्त कर सकते हैं ताकि आने वाले वक्त में जैविक फसलों के बूम में लीड लिया जा सके। इसके सदस्य अपने उत्पादन का व्हाट्स ग्रुप के जरिए विपणन भी करते हैं। सोही अब वेबसाइट तैयार करने के बारे में सोच रहे हैं ताकि बाजार के बड़े खिलाड़ियों के बरक्स खड़ा हुआ जा सके। सोही कहते हैं  जैविक खाद्यान्न के जरिए बड़े स्टोर खुब पैसा कमा रहे हैं। उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच बनाने से किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को बेहतर लाभ मिलेगा।

(अंग्रेजी दैनिक हिन्दुस्तान टाइम्स से साभार)

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