एम सुभाष चंद्र बोस तमिलनाडू के पुड्डुक्कोटई स्थित संत सेबास्थियर मैट्रिक स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र हैं। भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रतियोगिता आईजीएनआईटीई -2015 में उन्होंने भाग लिया। इस प्रदर्शनी में सौर ऊर्जा चालित बुआई मशीन के लिए उन्हें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ‘डॉ एपीजे अब्दुल कलाम आईजीएनआईटीई -2015 अवार्ड से सम्मानित किया। इस मशीन की मदद से काले चने, मूंगफली, हरा चना, और छोले जैसे फसलों की बुआई की जा सकती है। गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल सुभाष के इस उपकरण से खासा प्रभावित हुईं और एलान किया कि गुजरात के हर किसान को सौर ऊर्जा से चलने वाली इस बुआई उपकरण की सप्लाई की जाएगी।

आखिर सुभाष की बुआई के लिए बनाए गए इस उपकरण में ऐसा क्या खास है कि प्रदर्शनी में मौजुद हर व्यक्ति इसका मुरीद हो गया। आइए आपको बताते हैं सुभाष के इस उपकरण की खासियत। कैसे काम करता है ये उपकरण ?— उपकरण के छत पर फोटोवोल्टिक सेल युक्त एक सोलर पैनल है जो सीधे सूर्य प्रकाश से सूर्य की किरणें प्राप्त करता है

— प्रकाश के जरिए विधुत ऊर्जा जो प्राप्त की जाती है उसे एक चार्जर रिले यूनिट की मदद से सीधे बैटरी को भेजा जाता है

— बैटरी के माध्यम से इसे इन्वरटर से जोड़ा जाता है ( बैटरी रेटिंग 150 एएचच – 12 वोल्ट)

— इनवरटर से 230 वोल्ट एसी विधुत ऊर्जा को मोटर में स्थानांतरित किया जाता है। (मोटर रेटिंग ¼ HP – 1400 rpm)

— ड्राइव मोटर गियर बॉक्स से जुड़ा है।

— मोटर और गियर बॉक्स एक चेन ड्राइव (1) की मदद से आपस में जुड़े हैं।

— गियर बॉक्स के आउटपुट से विधुत ऊर्जा चेन(2) की मदद से मुख्य शॉफ्ट को हस्तांतरित किया जाता है।

— मुख्य शॉफ्ट की ऊर्जा दो चेन ड्राइव 3&4 में हस्तांतरित किया जाता है।

— चेन ड्राइव 3 : जो गाड़ी को चलाने वाली व्हील शॉफ्ट में विधुत ऊर्जा हस्तांतरित करती है।

— चेन ड्राइव 4 : जो ऊर्जा को सिलिंडर की आकार वाली लकड़ी से बनी रोलर को हस्तांतरित करती है जिससे वो रोलर घुमता है।

— सिलिंडर के आकार वाले लकड़ी के रोलर के बीच में उपर एक बीजों से भरा हॉपर लगा है जिसके दोनों किनारे बंद रखे गए हैं ताकि इन किनारों से बीज निकल कर बाहर न गिर जाएं।— लकड़ी के इस रोलर की निचली सतह पर एक हिस्से में छेद किया गया है। (100 मिमी के अंतराल पर एक दूसरे से बराबर दूरी पर पांच छेद किए गए हैं)

— बीज पहले लकड़ी के इस रोलर पर गिरेगा। जब रोलर घुमेगा और छेद उपर की ओर होगा तब ये सारे बीज उस छेद पर इकठ्ठा होंगे।

— रोलर के घुमने के क्रम में जब छेद नीचे की ओर आएगा तब बीज इससे बाहर की ओर गिरेंगे। (लकड़ी के इस रोलर के घुमने के क्रम में ही बीज इकठ्ठा होंगे और हस्तांतरित भी होंगे)

— निकलने की जगह पर कुल पांच लचकदार नली लगे होंगे। बीज इन नलियों में आएगा और जमीन के अंदर चला जाएगा। इससे बुआई हो सकेगी।

— इस उपकरण में जमीन की जुताई के लिए भी प्रणाली लगा होगा।

— जुताई प्रणाली का अगला हिस्सा मिट्टी खोदेगा और प्रणाली का पिछला हिस्सा उस खोदे गए मिट्टी में बीज डलने के बाद उसे भर देगा।

— जुताई का डिजायन इस तरह से तैयार किया गया है कि जमीन की 150 मिमी तक की खुदाई हो सकेगी। ( इससे मिट्टी में मौजुद सूक्ष्म जीवाणुओं को किसी भी प्रकार से होने वाली हानि को रोका जा सकेगा।)

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